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कवि और कविता

RishiitaaRishiitaa June 18, 2022
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कविता रिसती है हृदय से  ,

और खामोशी से कंठ में आती है,

खाट लगाकर कुछ देर वही ठहर जाती है। 

कविता रिसती है हृदय से  ,

और कांपते हाथों में आती है ,

साहस से हीन होकर वहीं खो जाती है ।

कविता नृत्य करती है मौन में ,

शोर में सहम जाती है ,

एकान्त कक्ष के कोने में ,

स्वयं को स्वतंत्र पाती है।

कविता बहती है कलम से ,

या कभी किसीके रक्त से। 

कविता प्रत्येक क्षण को ,

नया प्रारूप देती है ।

युवा की क्रोधानल , प्रेमी का पारिजात होती है,

कविता व्यथित मन की  मझधार होती है ।

कविता रिसती है हृदय से ,

संघर्ष करती है।

शब्दों को संजो कर , बात विस्तार करती है ,

कविता स्त्री भावना का रूप साकार होती है ।

- ऋषिता

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