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ओ कान्हा जरा बच के दिखाना
राधा ने तुम्हें रंगने को ठाना
१)
आज हैं चुनर रंगबिरंगी
मुख रम्या का हुआ सतरंगी
पित रंग से भरी पिचकारी 
आज बनी हैं वो अतरंगी
बच पाओ तो फिर स्वयं को बचाना
राधा ने तुम्हें......
२)
ले सखियों की एक टोली वो 
निकली हैं बन के भोली वो
यमुना तट गोपनीय की गलियां
ढूंढ रही हैं हमजोली वो
तो अंखियों से अंखियां चुराना 
राधा ने तुम्हें......
३)
है मतवाली फागुन बेला
कैसे छुपे मोहन अलबेला
बिन बोले ही सामने आया
महक उठी अब फाग की मेला
अब नेह का रंग,रंग पर चढ़ाना

ओ कान्हा जरा बच के दिखाना
राधा ने तुम्हें रंगने को ठाना.......!!#दीप्ति श्रीवास्तव

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