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तुझे अजनबी कहूँ कि आश्ना

AbhishekAbhishek November 21, 2021
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कल सफ़र में हुआ था जो

उस एहसास को क्या नाम दूँ

आग़ाज़ किसी दास्ताँ की

कि अंजाम-ए-तसव्वुर कहूँ


बेनाम सा एक शख़्स

अदाएं भी लाजवाब

हँसती है गोया शबनम

रूठे अगर तो आफ़्ताब


राह-ए-हयात में कभी

सामने वो आएगी जब

पूछूँगा, दिल पे मेरे

यूँ दस्तक देने का सबब


मैं रू-ब-रू नहीं उसके

पर, कहता है ये मेरा मन

दामन में हैं ख़ुशियाँ भरी

और ग़मों पे है चिलमन


ख़बर जिसे मेरे हाल की

लेती है जो मेरा नाम भी

है अजनबी, कि आश्ना कोई

मंज़िल तक सोचता रहा यही


      - अभिषेक


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