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फैलेंगी कैसे कोमल बाल लता

सहारे सा ज़रूरी है पिता

साया नहीं जिनके सर पे

पूछो उनसे कि क्या है पिता

ख़्वाहिशों की तिजोरी की

अनमोल चाभी है पिता

बढ़ न जाए बच्चों की ख़ता

इसलिए ज़रूरी है पिता

ख़ुशियों के ज़ायके वाली

त्योहार की थाली है पिता

हर माँ इसलिए सुंदर दिखती है

उनके माथे की लाली है पिता

आसां करने को जीवन का सफ़र

पसीने में तर-ब-तर है पिता

जाए क्यूँ कोई इबादत-गाह

पूजने को घर में है पिता

रंगीन जगमग तब है ज़िंदगी

हर राह पे गर, संग है पिता

ख़ुदा कर दे चाहे लाख अता

सरमाया बेश-क़ीमती है पिता


      - अभिषेक



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