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कहीं मुफ़्लिसी की पीड़ा

कहीं गाता हुआ फ़क़ीरा

कहीं भागा हुआ लुटेरा

कहीं नोटों का ज़ख़ीरा


कहीं पसीने की बूँद

कहीं रोटी के लिए संघर्ष

कहीं मख़मली बिस्तर

कहीं आईने जैसा फ़र्श


कहीं तन पर नहीं वस्त्र

कहीं सर पे तेज़ धूप

कहीं जिस्म ढकना मजबूरी

कहीं बनावटी रंग रूप


      - अभिषेक


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