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कामयाबी के कलश में

हासिलों का आधा जल


बेकल मन के फ़लक पर

संवेदनाओं का बादल


सिसकियों में जो ग़ुज़रीं

उन हालातों का प्रतिफल


कुटुम्ब की आशाओं पर

फैला हुआ अनल


गुणी भद्र के मध्य

अवगुणों का दलदल


संघर्ष के साज़ों पर

नाकामियों की ग़ज़ल


स्वजनों के ज़ेहन में

शर्मिंदगी का हर पल


अपेक्षाओं की कसौटी पर

बारम्बार रहा विफल


   - अभिषेक

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