LOVE IS NOT TOURISM's image
Share0 Bookmarks 11 Reads0 Likes

सात-आठ रोज़ का

है फ़ुज़ूल ये रिवाज़

प्रेम, इश्क़, उल्फ़त .... 

नहीं, हफ़्ते दिनों का मोहताज

मोहब्बत ऐसी शय है

जिसका अंत न आग़ाज़

पल-पल, हर पल, दिलों में

बजता रहता है ये साज़


       - अभिषेक


No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts