लता जी : सुर-संगीत की आत्मा's image
Poetry1 min read

लता जी : सुर-संगीत की आत्मा

AbhishekAbhishek February 6, 2022
Share0 Bookmarks 26 Reads0 Likes

भारत रत्न स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी के निधन से न केवल देश, बल्कि संपूर्ण विश्व मर्माहत है I ऐसी दैवी आत्मा का अवतरण सदियों में होता है I शब्दों से परे है लता जी की शख़्सियत I 


उनकी अलौकिक आवाज़ से अमर गीतों के खज़ाने से ही, चंद पंक्तियों के ज़रिए मैं उनके प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कर रहा हूँ I


ऐ मेरे वतन के लोगों

ज़रा आँख में भर लो पानी

लता जी छोड़ गई हैं हम सब को

रहना गुनगुनाते उनके गीतों को

अब यही तो हैं उनकी निशानी

...................... 


तेरे बिना, ज़िंदगी से कोई

शिकवा तो नहीं

तेरे बिना, ज़िंदगी भी लेकिन

ज़िंदगी तो नहीं


जी में आता है

आपके दामन में

सर झुका के, हम सब

रोते रहें रोते रहें ....

............................... 


नाम कभी नहीं गुम होगा

चेहरा भी सदा याद रहेगा

लता जी, आपने सच कहा था

आपकी आवाज़ ही पहचान है


विनम्र श्रद्धांजलि एवं सादर कोटि - कोटि नमन !


- अभिषेक



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts