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लता जी, आप स्वस्थ हो जाइए

AbhishekAbhishek January 30, 2022
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गीत हैं निःशब्द

साज़ बे-आवाज़

राग है गुमसुम

सरगम है मायूस

स्वर है उदास


महफ़िलें हैं सूनी

लय में नहीं ताल

धुन है बेहोश

संगीत है ख़ामोश

हर मंच है निराश


हे माँ ! सरस्वती

प्रार्थना है करबद्ध

सुरों की वो दिव्य देवी

है जो तुम्हारी ही छवि

वही तुम्हारी सुता

सबकी प्यारी "लता"

हर लो उनके सब कष्ट

कर दो उनको शीघ्र स्वस्थ


      - अभिषेक


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