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"लकी" : एक प्यारा साथी

AbhishekAbhishek June 16, 2022
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चाहा था तुझे सबने इतना

जैसे एक छोटा बच्चा तू

शांत, कोमल, श्वेत रंग का

दोस्त सखी सा सच्चा तू

सब अपनों का मन जीत के

क्यूँ छोड़ गया इतनी जल्दी

संभालेंगे कैसे दिल को

न भूल पाएँगे तुझ को

लगता है अब भी यही

आस-पास ही तू होगा कहीं

दौड़ के आ जाएगा अभी

छूट गया है साथ तुझ से

इस बात पे, नहीं होता यकीं

दिल में बसा रहेगा हमेशा

हमारा दुलारा प्यारा "लकी"


करता रहता था इधर उधर

कभी आँगन, कभी छत पर

ज़्यादा लाड जताना हो तो

सो जाता बिस्तर में घुस कर

आएगी हर पल याद तेरी

आँखों में रहेगी तेरी सूरत

ग़ैरों के लिए चाहे कुछ न हो

था तू हम सब की ज़रूरत


तेरे जाने से, देख पगले

छलक रहे हैं बेहद आँसू

है दिल से दुआ साथी

हो ख़ुदा की इतनी रहमत

उस दुनिया में भी सदा,

उतनी ही मिले चाहत

वहाँ भी तुझको मिले सुकूँ

चला गया है जहाँ अब तू


        - अभिषेक

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