हादसा's image
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बे-मुरव्वत था वो लम्हा

किया जिसने यूँ मजबूर

कि कमरे का दायरा भी

लगता है अब काफ़ी दूर

................................. 


ज़ख़्मों का इम्तिहान है

दर्दनाक हैं प्रश्न तमाम

हौसलों से उत्तर दिया है

आएगा सुखद परिणाम

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लड़ूँगा इस कैफ़ियत से

हौसला हारना नहीं मंज़ूर

सहूँगा हर तकलीफ़ मैं

जीतूँगा दर्द से जंग ज़रूर

.................................... 


उस रोज़ के हादसे से,

नहीं हुआ फ़क़त,

वो शख़्स ही लाचार ! 

आह आह करता है वो, 

कराहता है उसका परिवार !

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कभी चलते

कभी थिरकते

कभी दौड़ते थे मेरे क़दम


ज़ख्मों के तीखे रंगों से

एक हादसे की तस्वीर में

तब्दील हो गए हैं हम

......................................


यूँ तो दर्द के कुछ लम्हे हैं

और सहारों की बैसाखी है

पर हालात मुझे क्या रोकेंगे

इनकी कोशिशें नाकाफ़ी हैं



      - अभिषेक

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