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अंतिम क्षणों की दस्तक

AbhishekAbhishek October 27, 2021
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मत घबरा तू,

ऐ मेरे दिल

चाहे हों जैसे,

हालातों के घाव I

बाक़ी है फ़क़त जीतना अब, 

ज़ख़्मों के चंद ही दाव II


फिर ना तुझको

ठेस लगेेगी,

होगा ना मनमुटाव I

एहसास करेगा

जिस लम्हा,

साँसों से अलगाव II


मत डगमगा, 

अंतर्मन का सफ़ीना

चाहे हो जैसा,

वक़्त की मौजों में उतार-चढ़ाव I

चलता चल तू, 

है जिस जानिब

जीवन दरिया का बहाव II


क्या हुआ गर,

ताउम्र रहा

सुकून का अभाव I

शाद हो जा,

कि होने को है

चिर-निद्रा से लगाव II


    - अभिषेक

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