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दिल हमारा दिल बहलाने कि चीज़ थी - रेहान कटरावाले

rehankatrawalerehankatrawale August 11, 2022
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ना इन महफ़िलों से ना इन मयकदों से वास्ता था मेरा,

दूर था इस मतलबपरस्त ज़माने से जब तुम मेरे करीब थी।


साथ भी थे और कोई रिश्ता भी नही था दर्मियां हमारे,

सोचता हूं के मोहब्बत अपनी भी कितनी अजीब थी।


था यकीन के आवाज़ देकर रोक लोगे तुम मुझे,

अफ्सोस जहां से लौट आया मैं वो तुम्हारे घर कि देहलीज़ थी।


बड़ी आसानी से जाने दिया तुमने मुझे इस मौसम कि तरह,

जैसे दिल मेरा कोई दिल बहलाने कि चीज़ थी।


हम तो सजाए बैठे थे अरमान फ़ना होने के तुम्हारी बाहों में,

करते भी क्या आखिर हमारा अलग होना भी तुम्हारी तजवीज़ थी।


तुम्हारा तोहफ़ा समझ जिसे पहन कर इतराते रहते हैं रकीब,

बेखबर हैं शायद के कभी हमारे बदन पर भी वही कमीज़ थी।


इतना सब होने के बाद भी हम तुम्हारे खिलाफ़ कुछ लिख नही पाए,

मसला ये था जान-ए-जाँ तुम हमें जान से ज्यादा अज़ीज़ थी।


कहने को लोगों का इलाज़ करना पेशा था उसका,

हक़ीक़त ये थी कि बेवफाई के हस्पताल कि वो खुद एक मरीज़ थी।।





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