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पुरुबवा से अइलें बलम

Ravindra RajdarRavindra Rajdar November 10, 2021
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पुरुबवा से अइलें बलम

बेशरम होके,

मुंहवा में धइलें रहें उ चिलम

बेशरम होके |


नाइ देखेलें उ 

ना निरखेलें उ 

नाइ बुझेलें उ

ना बुझावेलें उ

धोई अइलें उ सगरी शरम ...बेशरम होके...


कपसल रहेलें हदसल रहेलें,

खाना दाना पानी से बिछड़ल रहेलें,

जरत जवानी हमार देखे न रजऊ,

बाती बे बाती में बिगड़ल रहेलें |

उहवाँ करी अइलें कवन करम

बेशरम होके,

पुरुबवा से अइलें....


सूतला में कवन कवन नाव बड़बड़ालें,

खोदी के जगा दी त बहुते घबड़ालें,

मरतानी मुँह नाही फेरे लें रजऊ,

राती बेराती उठी उठी चली जालें |

सूखवा के कई दिहलें उ भरम बेशरम होके,

पुरुबवा से अइलें....


सुने राजदार के न सुनेला सुजीत के ,

छाती पीटत रहे बंगलिनिया के प्रीत के,

सजल धजल सब बेकार कइलें रजऊ,

तनिको बुझेला नाही प्यार वाला गीत के |

सुगवा तूरी अइलें सगरी धरम 

बेशरम होके,

पुरुबवा से अइलें....


- रविन्द्र राजदार

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