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फूलों ने महकना छोड़ा कहाँ

Ravindra RajdarRavindra Rajdar June 12, 2022
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फूलों ने महकना छोड़ा कहाँ बाग भले बीरान रहा, 

नदियों ने बहना छोड़ा कहाँ सामने भले चट्टान रहा |


जीवन को कह देना मुश्किल कितनी नादानी होगी, 

इंसा ने जीना छोड़ा कहाँ देखता भले शमशान रहा |


सुख दुःख सहज ही हिस्सा हैं बिन इनके कैसा जीना, 

किसी ने सहना छोड़ा कहाँ अवतार भले भगवान रहा |


हार जीत भयभीत कहाँ करती है बीर बलवानो को, 

बीर ने लड़ना छोड़ा कहाँ सामने भले महान रहा |


- रविन्द्र राजदार 






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