धुआं या मिट्टी हो जाना है's image
Poetry1 min read

धुआं या मिट्टी हो जाना है

Ravindra RajdarRavindra Rajdar October 8, 2021
Share0 Bookmarks 197 Reads1 Likes

क्या करियेगा जनाब आसमां को छू के,

आखिर में तो इस ज़मीं पर ही आना है। 

मजा उठा सकते हो तो उठाओ जमीं का, 

इक दिन तो धुआं या मिट्टी हो जाना है। 


दूर जो उड़ गए तो घोसला भूल जाओगे , 

नया बना के रहने वाले कहाँ से लाओगे। 

रह क्युँ नही जाते जहाँ आपका ज़माना है,

इक दिन तो धुआं या मिट्टी हो जाना है। 


मत कहना की दिल है की मानता नही,

समझाइये इसे ये दिल सब जानता नही। 

दिल समझ गया तो किसको समझाना है,

इक दिन तो धुआं या मिट्टी हो जाना है। 


सपने बड़े हों पर छोटों का भी ख्याल हो,

दोनों के न मिलने का कभी न मलाल हो। 

बड़ी हंसी के खातिर मुस्कान क्युँ गवाना है, 

इक दिन तो धुआं या मिट्टी हो जाना है।


दुखी तो वो भी है जो बहुत बड़ा अमीर है, 

उसकी खुशी देखो जिसका ज़िंदा ज़मीर है। 

हर बात में खुश तो राजदार भी दीवाना है, 

इक दिन तो धुआं या मिट्टी हो जाना है।


- रविन्द्र राजदार 







No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts