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ककहरा कविता का

Ravi VermaRavi Verma May 26, 2022
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कैसे या,
तुर छाया जेया,
टोलती ठाडाढाल,
थादो,
धाए,
पाफैला ड़ा यंकर
मता हाँ वि लावो,
शिक्षा रीकी ही क्षत्रप,
त्रिगुण ज्ञाको

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