नदी समंदर से...'s image
Poetry1 min read

नदी समंदर से...

Ravi NakumRavi Nakum October 2, 2021
Share0 Bookmarks 109 Reads0 Likes

नदी समंदर से मिल गई।

ज़मीं आसमां से मिल गई।।


मेरी घड़ी मुझ से रूठती चली गई।

जैसे नैया मेरी मजधार में ही रुक गई।।


सब को अपनी मुहब्बत मिल गई।

पर ज़िंदगी मेरी इंतज़ार में ही गुज़र गई।।


-रवि नकुम (ख़ामोशी)

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts