मतलबी's image
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अरे कुछ लोग शहेर को छोड़,

बस्तियां संवारने में लगें है।

और तुम उसे उजाड़ने की बात करते हो?

संभल जा अरे ओ पागल इंसान,

क्यूं ख़ुद को बर्बाद करने पे तुले हो।

हस्ती खेलती ज़िंदगी क्यों मिटाने चले हो,

दूसरों की ज़िंदगी से क्यों खिलवाड़ कर रहे हो।

दुआ करो रब से की तुम अभी जी रहे हो,

बे-मतलब की इस दुनियां में मतलबी बन बैठे हो।




-रवि नकुम (ख़ामोशी)

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