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ख़ामोशी में खोने लगा हूं

Ravi NakumRavi Nakum October 16, 2021
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आदतन मुस्कुरा देता हूं।

कुछ ऐसे ही दर्द छुपा लेता हूं।।




कोई पूछ ले भूल से भी।

तो बस हां में हां मिला लेता हूं।।




नज़दीकियों से बहुत दूर-दूर।

मैं ख़ुद से भी दूर-दूर होने लगा हूं।।




कोई जान न ले हाल-ए-दिल मेरा।

इसी वज़ह से मैं तन्हाइयों से मिलने लगा हूं।।




अपने आप से भी नफ़रत करने लगा हूं।

इसी लिए मैं अब 'ख़ामोशी' में खोने लगा हूं।।




-रवि नकुम (ख़ामोशी)

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