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विभ्रान्ति(Confusion)

Ravi MishraRavi Mishra June 16, 2020
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बात जवानी की रवानी की करू

या छोटे बचपन की कहानी की करू

अल्हड़ सा फिरुँ या सावधानी से चलूँ

बेवाक सी बाते या जिम्मेदारी से कहूँ !!

बात जवानी की रवानी की करू

या छोटे बचपन की कहानी की करू !!

अपनी नजर सही या उसकी या फिर किसकी

अपनी बात मानू या फिर सबकी

बतासी बनूँ या उल्लू सा उडु

फ़सादी बनूँ या शांति से रहूँ

बात जवानी की रवानी की करू

या छोटे बचपन की कहानी की करू

जग हसता है और जग ही कहता है

जग जलाता है और जग ही कहता है

इस गंगा में सब बहता है और तू क्यों फसता है

बहते बाते बहते रातें बहते रक्त बहते भक्त

बहती हर मिसाल बहती हर चाल

इस गंगा में सब बहता है और तू क्यों फसता है

बह जा। .. क्यों तू इतना खंगालता है

बह जा। ... क्यों तू इतना सोच पालता है !!

इस गंगा में सब बहता है और तू क्यों फसता है

बात जवानी की रवानी की हो या कोई बचपन की कहानी की हो

बात इसकी हो या उसकी हो

बात उल्लू की हो या बतासी की हो

ये वो गंगा है जिसमे हर रँग चढाता है ना जाने तू क्यों भ्रम रखता है

इस गंगा में सब बहता है और ना जाने तू क्यों फसता है...

#ravim1987

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