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Romantic PoetryPoetry1 min read

उसके गाल का वो तिल - रवि कांत कुड़ेरिया

Ravi kant KuderiyaRavi kant Kuderiya October 26, 2021
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देखकर पहली बार उसके गाल का वो तिल, 
गिटार की तरहा बजने लगा था मेरा दिल।

बस निहारती ही रह गयी थी उसी को मेरी नज़र,
बहुत ही बुरा हुआ था मेरे दिल पर इसका असर।।

मानो पागल ही कर दिया था मुझे उसके तिल ने, 
बसा लिया था उसी की सूरत को मैंने अपने दिल मे।

अंदर से मेरे दिल की आवाज मुझसे बोली,
यही तो है वो आएगी जिसकी तेरे घर डोली।।

  ~ रवि कान्त कुड़ेरिया

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