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महज़ चंद पन्नो में ही सिमट गयी मेरी मोहब्बत

Ravi kant KuderiyaRavi kant Kuderiya November 19, 2021
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महज़ चंद पन्नो में ही सिमट गई 
मेरी मोहब्बत -ए- दास्ताँ।

समझता था जिसे मैं चांद अपना
बदल लिया है उसने अपना आसमाँ।।

   ~ रवि कांत कुड़ेरिया

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