नदी और पहाड़'s image
Share0 Bookmarks 19 Reads1 Likes

नदी के बिरह

और पहाड़ के एकाकीपन से

कौन वाक़िफ़ है ?

नदी किसके वियोग में

बहती चली जाती है ?

पहाड़ इतने निर्जन में

क्यों अकेले खड़ा है !

क्या उसे किसी का इंतज़ार है?

हां,

उसका अंतहीन इंतज़ार ही

उसकी ऊंचाई और सुंदरता है

जिस दिन ख़त्म हुआ

उस दिन पहाड़ टूट जाएगा



नदी का विरह जिस दिन ख़त्म हुआ

उस दिन वह सूख जाएगी

-रत्नेश मिश्र 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts