तलाशे इश्क's image
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ज़ुस्तज़ु, तलाशे इश्क, ख्वाहिसे भला अब क्यूँ

मरहलों के भी मरहलें अब तो पार हुए…

मंज़िलों में कोई दम नहीं वो सब अब तो बेकार हुए

एक आग, और एक चिंगारी रूहों के क़ल्बों में अब भी सुलगि हैं

की काश कोई मुक़द्दस हवा चले की असल वजूद की लौ जले…

“Rashid Ali Ghazipuri”








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