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बेरंग सा हूँ

Rashid AliRashid Ali June 21, 2022
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वफ़ा की चाहत ,

पर मैं बेरंग सा हूँ

तेरे लिए प्रिये मैं मलंग सा हूँ

बस भटकता ही रहता हूँ

तेरी ही गलियों में

न कोई ड़ोर नहीं कोई आसमा

फिर भी उड़ता फिरता कोई पतंग सा हूँ

“rashid ali ghazipuri “



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