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Nepali PoetryArticle1 min read

जिंदगी की है अजीब दास्तां

Ram Krishan RastogiRam Krishan Rastogi November 3, 2021
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ये भी अजीब दास्तां है जिंदगी की,
कोई सोचता है,
धनतेरस पर कितना लेना है सोना
कोई सोचता है,
धनतेरस पर अब कहा है सोना।
इस उधेड़बुन में बीतती है जिंदगी,
चारो तरफ मच हुआ है ये रोना।।

आर के रस्तोगी गुरुग्राम

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