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ख़त की मौत से अफ़सोस हुआ

Ram KamalRam Kamal January 21, 2022
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ख़त की मौत से अफ़सोस हुआ, 

मोहल्ले में भी कुछ अल्फाजों के आशिकों ने, 

आँसू बहाएं। 

लिफ़ाफ़े तो मानो विधवाओं का लिबास में लिपटी, खामोश सी रह गई। 

ख़त के मौत से अफ़सोस तो डाकिए को भी हुआ, 

उस का इंतजार अब कोई दरवाज़े पर ना रहा। 

ख़त की मौत से, कागजों को ठेस पहुंची, 

स्टाम्प का पंख लगाए उसकी उड़ान तो हमेशा के लिए रुक सी गई। 

ख़त के मौत से, इश्क अकेला सा हो गया,

सूखे गुलाब के पत्तों में, वो शब्दों की महक 

आखिरी साँस छोड़ सा गया।

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