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बुन्देली लोक गीत

Raj Painter BundelkhandiRaj Painter Bundelkhandi January 15, 2023
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शीर्षक -जाड़ों

अब तो आगी बारो रे - रामधई

अब तो आगी बारो रे

होन लगो है जाड़ों भैया,आगी बारों रे

अब तो आगी बारों रे...

भुंसारे से परत कोहरो

कछु नई देत दिखाई 

रामधई कछु नई देत दिखाई

दबे परे रात खटिया पे,

छोड़ी ना जाये रजाई

बाई कात हो गओ भुंसारो रे ,

हो गओ भुंसारों रे, होन लगो है...

थर थर कपे काकी मोरी

कक्का कप कप जाबे

जब बुड़की की चले लहरिया

देहिया जम जम जाबे

भोला खां कैसे ढारों रे,,

होन लगो है...

किसान विचारो खेती करके

दे रओ फसल खोँ पानी

जवान देश की रक्षा के लाने

कर देत निछावर जवानी

'राज' वीरों को न बिसारो रे

होन लगो है जाड़ों भैया....

रचनाकार

-राज पेंटर बुंदेलखंडी

 बुन्देली मोड़ा

पता -नौगांव जिला छतरपुर मध्य प्रदेश बुंदेलखंड

मो.9981387270


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