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कविता ऐसी होनी चाहिए - राजेश तैलंग

Rajesh TAilangRajesh TAilang March 14, 2022
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कविता ऐसी होनी चाहिए 

जिसकी तहें खोल कर 

शॉल की तरह ओढा जा सके

एक चादर के जैसे बिछाया भी जा सके

जिसे रबर के जैसे खींच कर 

बाल बांधे जा सकें

जिसे गुब्बारे के जैसे फुला कर 

एक रोते बच्चे को चुप कराया जा सके

कविता को एक कविता कहलाने के लिए 

बहुत काम करने पड़ते हैं

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