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Peace PoetryPoetry1 min read

जब हम मिलना बंद कर देंगे, तब हम चाँद पर मिलेंगे - राजेश तैलंग

Rajesh TAilangRajesh TAilang March 14, 2022
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बातों के बीच आ जाती 

असहज चुप्पियों में

प्रेम प्रस्ताव रखता हूँ मैं

तुम चुपचाप ही 

सहजता से

उसे ठुकरा देती हो

हमेशा

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गुल्लक बड़ी नाज़ुक होती है,

मज़बूत होता है

न तोड़ने का इरादा

महफूज़ रखता है

कच्ची गुल्लक को।

______________________

कोई भी अहसास

गर दिल की गिरफ्त छोड़कर

चेहरे का रुख करता है 

रोक देता हूं उसे वहीं का वहीं

लोग आजकल हर चीज़ को 

इश्तेहार समझते हैं..!!

______________________

हम कबीलों में तब्दील हो चुके हैं और कबीले इंसाफ नहीं करते , बदला लेते हैं ।

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