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Romantic PoetryPoetry1 min read

तुम्हारा इल्म ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini May 28, 2022
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जमाने ने कहाँ देखा तुम्हारे इल्म का जलवा,

वो तो तुम्हारे हुस्न पर ही दिल हार बैठा है,

 तुमने भी कहाँ अपने दिल में झाँक कर देखा,

मुझ सा दिवाना तुम पर कब से दिल वार बैठा है ।

 - राजीव ' हैरान '

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