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Romantic PoetryPoetry1 min read

तेरी मूरत। ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini February 28, 2022
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दिल के टुकड़े को,

ख्वाबों में तराशा है,

तब कहीं जाकर,

तेरी मूरत उभरी है,

वफ़ा के मतलब को,

जमाने में तलाशा है,

तब कहीं जाकर,

तेरी सूरत उभरी है.

 - राजीव ' हैरान '

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