सजा  ' हैरान ''s image
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सजा मासूम दिल को,

गुनाह कोई नहीं,

कभी रूठने की धूप,

कभी जलवों के सितम,

मुहब्बत के खेल में,

पनाह कोई नहीं.

 - राजीव ' हैरान '

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