रोशनी  'हैरान ''s image
Poetry1 min read

रोशनी 'हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini October 26, 2022
Share0 Bookmarks 38 Reads1 Likes

हवाओं जरा संभल कर चलो,

दियों की रोशनी शबाब पर है,

रोशन हुए गलियाँ बाजार सब,

रूह रोशन हुई ये दिल के अन्दाज पर है।

 - राजीव ' हैरान '

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts