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प्रकृति ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini May 26, 2022
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झरत निर्झर कुंज झर झर,

हरत मन पुलकित हर हर,

चलत पवन वसंती सर्र सर्र,

उल्लासित गात्र चंचल अर अर,

बहत सरित निनाद कल कल,

बसत प्राण अविराम सरगम ।

 - राजीव ' हैरान '

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