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Romantic PoetryPoetry1 min read

मुहब्बत की चाँदनी ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini April 13, 2022
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जिन्दगी में खिली हो मुहब्बत की चाँदनी,

फिर गम के अँधेरों का जिक्र ही क्यों हो,

मिल गया हो हमदम दिल ने जिसे चाहा हो,

फिर गम के अँधेरों की फिक्र ही क्यों हो.

 - राजीव ' हैरान '

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