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माँ चली गई ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini July 20, 2022
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घुल गई मेघों में सागर में,

समा गई व्योम में विमाहीन होकर,

मिल गई धरा से बनकर भस्म,

चल पड़ी अनजान बनकर पवन,

तेज में तप कर पा लिया पुनीत मन,

बस गया ईश चरणों में तेरा ये पुनीत मन ।

माँ चली गई ।

 - राजीव ' हैरान '

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