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Romantic PoetryPoetry1 min read

इब्तिदा-ए-इश्क ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini January 5, 2022
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इब्तिदा-ए-इश्क ही में रह गए उनके होकर,

किसी और से वादा-ए-वफा़ कर लें कैसे,

अंजामे मुहब्बत वस्ल ही हो जरूरी तो नहीं,

बाद इसके जमाने में जियेंगे कैसे।

  - राजीव ' हैरान '

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