हीरक  ' हैरान ''s image
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गोल चाँद ,गोल सूरज धरा ,

गोल मुक्तक माणिक्य क्यों न हों भला ,

पर जो तराशे जाने की पीड़ा झेलता ,

वही हीरक झिलमिलाता अंग पर ।   

- राजीव " हैरान '

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