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Romantic PoetryPoetry1 min read

हिज्र और वस्ल 'हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini December 27, 2021
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रखके सिर हिज्र के शाने पर ,

जी भरके सोने दो उनको ।

कि तुम्हारी याद नें ,

उन्हें चैन से सोने न दिया ।

मिलकर गले वस्ल से ,

जी भरके रोने दो उनको ।

कि तुम्हारी चाहत ने ,

उन्हें खुलके रोने न दिया ।

      - राजीव ' हैरान '

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