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धन्य हुआ मां तुझे पाकर ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini August 11, 2022
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जिसकी भोर रुपहली,

और हर दोपहर सुनहरी,

जिसकी शाम सुरमई,

और हर रात चाँदनी, 

जिसकी नदियाँ बहती निर्मल, 

 और शस्य श्यामला धरती उर्वर,

जिसकी सम्पदा वन रत्नाकर,

और मुकुट हिमाच्छादित भूधर,

जन गण जिसके शुभ कर्माकर,

और अधिनायक सदैव शुभकर,

धन्य हुआ जन मां तुझे पाकर,

वन्देमातरम्।

 - राजीव ' हैरान '

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