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Romantic PoetryPoetry1 min read

बेइन्तहा ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini January 25, 2023
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जुबां की हद के बाहर हैं,

तेरे जलवे और मुस्कानें,

कलम की जद से बाहर हैं,

हसीं दिल के ये अफ़साने,

नशे की इन्तहा करते,

तेरी नजरों के पैमाने,

इस सारी बेइंतहाई को,

मैं जानूं या दिल जाने।

 - राजीव ' हैरान '

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