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बहती नदिया ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini November 15, 2022
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बहती नदिया मौज में,

जाने किसकी खोज में,

घाट घाट इतराती बहती,

वन प्रान्तर सरसाती बहती,

बहती पर्वत छोर से, 

सागर से फिर जा टकराती,

घुल मिलकर सागर बन जाती,

रहती अपनी मौज में,

जाने किसकी खोज में।

 - राजीव ' हैरान '

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