अन्तर। ' हैरान ''s image
Share0 Bookmarks 64 Reads0 Likes

कहीं भूख सताती पल पल,

जीर्ण वस्त्र में लिपटी काया,

कहीं पड़े हैं भरे खजाने,

हर पग बढ़ती जाती माया.

 - राजीव ' हैरान '

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts