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अभी आग बाकी है

Rajat AgrawalRajat Agrawal October 4, 2022
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माना कि अभी आग नहीं हूं मैं,
सुलगता अंगारा हूं पर, अभी राख नहीं हूं मैं।

बाकी है हौसलों में चिंगारी अभी,
जिंदा है सपने, अभी ख़ाक नहीं हूं मैं।

माना कि अभी आग नहीं हूं मैं,
सुलगता अंगारा हूं पर, अभी राख नहीं हूं मैं।

बाकी नहीं है कुछ कहने को, खामोशी का दौर है,
हां अब पहले जैसा बेबाक नहीं हूं मैं।

माना कि अभी आग नहीं हूं मैं,
सुलगता अंगारा हूं पर, अभी राख नहीं हूं मैं।

सोने सी सीरत थी नाकामयाबी से पहले पर,
ज़माने की नज़रों में अब उतना पाक नहीं हूं मैं।

माना कि अभी आग नहीं हूं मैं,
सुलगता अंगारा हूं पर, अभी राख नहीं हूं मैं।

देर कितनी लगती है भला शोलों को लौ बनने में,
एक अदद हवा का झोका ही काफी है,
पर एक झोके से भुज जाऊं वो चिराग नहीं हुईं मैं।

माना कि अभी आग नहीं हूं मैं,
सुलगता अंगारा हूं पर, अभी राख नहीं हूं मैं।

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