तकरार's image
Share0 Bookmarks 17 Reads0 Likes

हाँथो की लकीरो से तक़रार लिए बैठे है

जिंदगी जीने के हर औज़ार लिए बैठे है

हौशला है अभी बाकी मालूम हो जमाना

दुआओ की पतवार मझधार लिए बैठे है

कुछ देर ही सही अब जो सीखा है हुनर को

राकीबो के शहर में हम नकाब लिए बैठे है

मिट ही जाती ये हस्ती जो बता देते हर "राज"

हँसते है सारे आम दिल में गुबार लिये बैठे है

जख्मो की कमी न थी जो "राज" मिले हमको

पत्थर के हर टुकड़े को खुदा जान लिए बैठे है

मानिंद मेरे बर्बादी को अब कुछ लोग है बेताब

सुनाने को खैरियत यहाँ अख़बार लिए बैठे है

क्या मिटायेगी ये दुनिया जो तू साथ है मेरे

पहलु में तुम्हारे घर द्वार लिए बैठे है .......



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts