अरमान's image
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एक आसमान तलाशते है अरमान मेरे

कुछ दाग दबे थे जो दिखाने को 

कितने रंग संजोये थे तूने ए जिंदगी

हासिल क्या क्या था फिर बताने को 


चलते रहे राह गुज़रे जो अब तक 

गुजारी वो राते फिर फ़ज़र के पाने को

साया भी अब तो थक सा गया है

एक ठौर ढूंढता है "राज"सुस्ताने को


उम्मीद कायम थी हर साँस पे मेरी 

कौन पढ़ता था दुआ मेरे बचाने को

काश फिर बाग़बान की नज़र हो जाए

तपती थी ज़मी फिर जो मुरझाने को 


बागी हो गया हूँ अब हालात से अपनी

ज़िद है फिर उन दागो को मिटाने को

खुद ही भुला दिए गुज़री जो ख़ुद पे

नया आगाज़ था अंजाम के पाने को


ताकता रहा बस वहाँ से कही न कुछ

मौला तू ही तो रहा अब बस बताने को

बिछड़े थे "राज" कल तक के रिश्ते

कहते थे जिन्हें अपने हम ज़माने को 


तिनको से फिर एक नया आसरा है

"राज़" कश्ती को भवर से बचाने को 

जोड़े थे अबकी फिर उनसे जो रिश्ते

बाकी थे "राज" फिर से आजमाने को...


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