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सब अंदर से ही निकल रहा है

Raj vardhan JoshiRaj vardhan Joshi March 1, 2022
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अंदर से ही
सब निकल रहा है
सब अनंत से चल रहा है
जो था प्रश्नकर्ता 
वही उत्तर दे रहा है
वो जो सर्वत्र विद्यमान है
उसमें है जीवन प्राण है
हर रोम में हर कूप में
हर काल में हर रूप में
जीव जीवन जगत
बीज था जो कल वही
आज वृक्ष बन रहा है।
'राज वर्धन जोशी'

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