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फिर कदम बढ़ा क्यों डरता है

Raj vardhan JoshiRaj vardhan Joshi March 3, 2022
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मेरे मन के मदिरालय में
है अजब नशा मीठा मीठा
आ बैठ जरा चख ले जी ले
भर भर पी ले मीठा मीठा
मेरी मदिरा शब्दों से बनी
भावों में पकी अंसुवन सी बही
है भरी हृदय के गागर में
ले आ प्याला अपने पन का
पी ले जी कर मीठा मीठा।
कितने संकल्प साहस कितना
धैर्य मिलाया है कितना
तब जाकर उफनी है रसना
सब मिलकर निकली है ये मदिरा
यदि है इच्छा मदपान करूँ
इस जीवन का सम्मान करूं
फिर बढा़ कदम क्यों डरता है
पी ले जी ले मीठा मीठा।
'राज वर्धन जोशी'

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